Poetic

Begin, Again.

दस्तक हुई इस दिल पे,
एक हल्की सी आहट हुई,
तोड़ा झाँका बाहर,
तो तुमसे मुलाकात हुई

खुले पिटारे मे थी कुछ बीती यादें,
उठे सैलाब सी हुई अनकही बातें

कुछ जानी पहचानी सी हैं ये मुस्कुराहट,
एक गुज़रे हुए सुकून जैसी है ये आदत

तेरे होने का ही है ये सारा असर,
कुछ पुरानी कहानी, कुछ नये मंज़र

 

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Day 18 – Forever or never?

100writingdays_foreverornever

“And there I was running and sprinting

Crying, laughing yet busy planning

A life full of family and friends

Of old traditions and new trends

Little did I ever imagine or reckon

Perhaps I might cease to breathe the next second.”